@evdni26n

Amit Kumar
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कविता, ग़ज़ल, शायरी

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Submitted on 09 Jan, 2020 at 13:56 PM

हर नया सवेरा एक कोरा पन्ना है, ज़िन्दगी के कलम से कुछ भी लिखा जा सकता है। *अमित कुमार

Submitted on 06 Jan, 2020 at 12:57 PM

सीखना बंद, तो जीतना बंद.... *अमित कुमार

Submitted on 03 Jan, 2020 at 12:21 PM

निर्भरता हमेशा कामजोर बनाती है, निर्भयता हमेशा आगे बढ़ाती है। *अमित कुमार

Submitted on 31 Dec, 2019 at 03:15 AM

ज़िन्दगी में कुछ भी हासिल किया जा सकता है, लेकिन हासिल सिर्फ दो शर्तों पर ही होगा, आपकी मेहनत और रब की मेहर.... *Amit Kumar

Submitted on 30 Dec, 2019 at 13:43 PM

टूटने के बाद ही अक्सर सम्भलने का हुनर आता है। *Amit Kumar

Submitted on 21 Dec, 2019 at 07:37 AM

कभी अनिश्चितता से कुछ भी निश्चित नहीं हो सकता। *Amit Kumar

Submitted on 19 Dec, 2019 at 08:42 AM

जब तक आप सोचने का काम शुरू नहीं करेंगे, ताउम्र आप जहाँ हैं वहीं रह जाएंगे। *Amit Kumar

Submitted on 16 Dec, 2019 at 09:44 AM

तूफान में ताशों का घर नहीं बनता! रोने से बिगड़ा हुआ मुकद्दर नहीं बनता। *Amit Kumar

Submitted on 16 Dec, 2019 at 09:39 AM

चुप रहना भी संस्करों की एक तहज़ीब होती है! लेकिन कुछ लोग हमें बेज़ुबान समझ लेते हैं। *Amit Kumar


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