मैं संगम हूं - नई और पुरानी धाराओं की इतनी नई कि प्रगतिशील सोच अपना सकूं इतनी पुरानी कि पुराने संस्कार निभा सकूं।
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जो मज़ा बचपन में माता पिता के साथ ज़िद करके सिनेमा देखने में आता था, वो अब मल्टीप्लेक्स ने भी नहीं आता।