Mahesh Koli

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ख़ुश्बू इत्तर की पसंद आयी तो मुहब्बत वो कबुल कर गये इत्तर बदला तो ये देखा की वो भी अब बदल गये

साफ दामन हमारा भाया ना था जिन्हे आज फिर एक बार मैल में खेल रहे है हमारी वफाई रास ना आयी थी उन्हें आज फिर किसी बेवफ़ा पे मर रहे है

ताज़े फूलों से ज़्यादा हम सूखें गुलाब को सहजते है सच कहते है लोग यहाँ गम ज़्यादा बिकते है


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