Anamika Agrawal
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तलाशते हुये स्वयं का अस्तित्व पुरी जिन्दगी निकल गई मेंरी अब। मैं को छोड़ने के बाद ही मील पाई हूं खुद से मैं अब।।

मेरी हर लाइन पर तुम वाह-वाह करते हो। मेरे कलम की आवाज को गुमराह करते हो।। मर जाती है कलम खुद की झुठी तारिफ से। बख्श दो इसे अब , तुम बेमतलब की तारिफ से।

हर दाने को अनमोल समझकर किसानो का सम्मान करे। अनाज के हर दाने का उपयोग कर भुखो तक भोजन पहुंचाये।।


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