मन की अनुभूतियों के उद्गार शब्दों में उकेरने की कला ही लेखनी बन कर व्यक्ति और समाज को नई राह दिखाती है
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जैसे दया की कोई चादर, मन अमृत का प्याला वो है मेरी प्यारी माँ, सारे जग से न्यारी माँ। 🖋-सुनीता शुक्ला
”पछतावा"...अतीत नहीं बदल सकता और “चिंता"..भविष्य नहीं सँवार सकती! इसलिए.. वर्तमान का आनंद लेना ही जीवन का सच्चा सुख है!! 🙏🏻💐💐🙏🏻 -Sunita Shukla (cool thoughts)
भले सब पर मेरा बस न चलेे, अथक प्रयत्न पर भी विपत्ति न टले। पर फिर भी रहूँगी अडिग मैं खड़ी, थामे अपने हौंसलों की कड़ी। क्योंकि मैं हूँ नारी, अटल, सबल और विश्वास की लड़ी।। -सुनीता शुक्ला
प्रेम से भरी हुईं "आँखें" श्रद्धा से झुका हुआ "सर", सहयोग करते हुऐ "हाथ", सन्मार्ग पर चलते हुए "पाँव", और सत्य से जुड़ी हुई "जीभ", ईश्वर को बहुत पसंद है ।। 🙏🙏 -सुनीता शुक्ला
कुछ अच्छे भाव बिखेर दो, आस्था की ज़मीन पर। भक्ति भाव का पल है, शायद कुछ अच्छा पनप जाए।। 🏵🙏🙏🏵 #SeedhiBaat -ss