Devkaran Gandas
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AUTHOR OF THE YEAR 2019 - NOMINEE

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Lecturer School Education

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मैं तेरे मन को दुःख पहुंचाऊं , है ऐसा मेरा नहीं इरादा, दुखी किया है तुमको जब, दुखी हुआ मैं तुमसे ज्यादा, तेरी मंजिल मिल जाए तुझको, बस इतनी सी चाहत है फिर नहीं पलट कर देखूंगा, ये करता हूं मैं तुमसे वादा।

प्यार का बस इतना सा अफसाना खुद को खोकर खुद को पाना , जिसने पा लिया वो फिर ना डूबा जो रह गया वो बन गया दीवाना । .........✍️देवकरण

तू सपने देख उन्हें मेहनत के पंख लगा और छू ले आसमां , दिखा दे जमाने को तेरी छलांग में दम है । वो , जो उंगली उठाते हैं तुझ पर तुझे अबला की संज्ञा देते हैं बता दो उन्हें आसमां में हम ही हम हैं । ............✍️देवकरण

जो दिखता है वो ही नहीं है दुनियां में सब दिखावा है जो करना है आज ही कर ले कल तो एक छलावा है । ......✍️देवकरण

कब आएगी वो सुबह जब सारा जहां होगा मुक्त गगन और उसमें विचरण करेंगी बेटियां उन्हें नहीं होगा कुछ हो जाने का डर वो पंख लगाएंगी अपने अरमानों को और जीत लेंगी जहां को ना जाने कब आएगा वो वक़्त ... ......✍️ देवकरण

चल पड़े हैं हम तेरे दिल की डगर अब रास्ता भी तू है और मंजिल भी तू । ........✍️देवकरण

तुम्हें याद करना अब बन गई है आदत , इसे इश्क़ लिखूं या लिखूं इबादत , माना है तुम्हें मेरे दिल का ख़ुदा , मिल जाओ मुझे यह कर दो इनायत । .........✍️देवकरण

कैसे पढूं मैं उन चेहरों को जिन्होंने खुद को नक़ाब से ढकाया है , जब परतें उतरने लगी तो पता चला उनके नक़ाब के नक़ाब पर नक़ाब का साया है । .............. देवकरण


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