आकाशवाणी की सेवा से रिटायर्ड।लेखन में रुचि।अनेक पुस्तकें प्रकाशित |अनेक संस्थाओं से पुरस्कृत।
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वह और दौर था जब हम सिर्फ दुपट्टा खींच कर अपनी आशिकी जताया करते थे ! आज का दौर है जब सीधे होठों पर चुम्बन जड़कर अपनी आशिकी का इजहार कर दिया जाता है !..कोई शक़ ?