Umesh Shukla
Literary General
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ब्रह्म की खोज में निरत एक शब्द साधक

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जीना तो है बस उसी का जो औरों को दिखाए राह हताशा,निराशा को छांट के भर दे औरों में भी उत्साह

हर जीवन में सुख, दुख आएं जैसे धूप और छांह ईश्वर की कृपा से मनुष्य सभी में खोजे सही राह

लोकतंत्र में अर्थ खो गए अब सारे के सारे कानून धन्नासेठों की तिजोरी में कैद सब नेता अफलातून

बड़े शहरों में कौन करता बूढ़ों, बरगदों की परवाह विकास की चकाचौंध में डूबे अपने, बेकद्री अथाह

जब जब देश की युवा शक्ति हो जाती तीव्र निद्रा में मग्न तब तब अनुत्तरित रह जाते उसके भविष्य से जुड़े प्रश्न

लफ्ज़ ख्यालों को बखूबी नुमां करते हैं प्रेम या जंग हो दोनों में असर करते हैं

जग में बिखेरते रहें स्नेह नाम अनुसार जन्मदिन पर बधाई शुभकामनाएं अपार

घंटा छोड़कर भागने का रहा जिनका कीर्तिमान वो ही आज तय कर रहे शिक्षा के अहम प्रतिमान

राम कृपा पर रखिए अपना अटूट विश्वास विघ्न,बाधाएं टिकेंगी नहीं कभी आसपास


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