chanchal jaiswal
Literary Captain
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मन की तरलता कलम की स्याही है, दिल की अदालत में मेरी गवाही है। सवाल वाज़िब हैं जज़्ब मसले हैं, उसी के दर पे मेरी सुनवाई है। सुनेगा मेरी भी सबकी सुनता है, उसके पास हर मर्ज़ की दवाई है। I am an Assistant Professor, English, a poet, a blogger and author...What I feel, desire, aspire and admire;... Read more

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लिखें क्या अँगूठा एकलव्य हुआ महलों में आयोजन कोई भव्य हुआ कल समाचार रक्त में लिखा जाएगा फिर भी राजा को होश कहाँ आएगा

आँखों में शब भर अँधेरा है नूर रोशन ख़्वाब तेरा है आजकल ख़्वाबों में भी आता नहीं गुँचे शबनम के गीत कोई गाता नहीं लाज़िम है बिन तेरे यहाँ मायूसियों का डेरा है

उन निगाहों में मेरा ख़्वाबे निज़ाम अल शहर है मेरा मुसलसल सफ़र भी हमसफ़र भी ठामो ठहर है मेरा


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