डॉ.अरुण प्रताप सिंह भदौरिया 'राज' ( साहित्यकार,रंगकर्मी,समाजसेवी, फिलेटलिस्ट,सिने एक्टर,मोटिवेशनल स्पीकर,शार्ट फ़िल्म मेकर)
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बाढ़ की विभीषिका अनदेखा कहर है, जीवन की धारा में दर्द भरा सागर है। नदियाँ बेकाबू, गाँवों का विनाश करतीं, प्रकृति का क्रोध है, सब पर प्रहार करतीं।
चंद लफ्जों में लोग अपनी बात बता देते है, एक पल में अपनी औकात दिखा देते हैं. बिना सोचे ही इल्जाम लगा देते है, पहले के अहसान सब भुला देते हैं. @ डॉ. अरुण प्रताप सिंह भदौरिया