डाँ मोहन लाल अरोड़ा ऐलनाबाद सिरसा हरियाणा सामाजिक कार्यकर्ता लेखक कवि एवम साहित्यकार
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🌹गहरे जख्म 🌹 उलझी ना कभी नजरें उनसे ग़म फिर भी वो उम्र भर का दे गईं बात ना कही मैने उनसे दिल की अपने फिर जाने किस बात पर वो रूठ गई शिकवा रहा हमेशा उसकी जुबान पर चलते हुए जख्म वो गहरे दे गईं नाराज़ थी वो हर मुस्कराहट पर मेरी छुपने लगी वो हर आहट पर मेरी जाते हूऐ वो मेरा काम आसान कर गईं दे कर गहरे जख्म उम्र भर के वो मोहन की रूह अपने नाम कर गईं भूला वो भी ना सकेगी मुझको जो अपने इश्क मे मुझ
💐💐💐 कोई भी इंसान कभी भी निर्बल नहीं होता केवल विवशता ही उसे निर्बल बनाती है 💐💐💐 डाक्टर मोहन लाल अरोड़ा
बहुत खुबसूरतयेआंखें तुम्हारी इन्हें बना दो किस्मत हमारी नहींचाहिएजमानेकीखुशीया अगर मिल जाएं मुहब्बतुम्हारी
💞असल मुहब्बत तो पहली मुहब्बत थी 💞 💝 इसके बाद तो हर किसी सख्श मे सिर्फ उसी को ढुंढा है,,,।💝💝 डाक्टर मोहन लाल अरोड़ा
💞मुहब्बत 💝 में कोई जबरदस्ती नहीं होती 💝जब तुम्हारा जी चाहे तुम बस मेरे हो जाना ,,।। डाक्टर मोहन लाल अरोड़ा
💞 हमारी जिंदगी क्या है💞 मुहब्बत 💝 ही मुहब्बत है तुम्हारा भी यही 💝दस्तूर बन जाये तो 💞अच्छा है ❤️🩹❤️🩹 डाक्टर मोहन लाल अरोड़ा