लिखना अच्छा लगता है।
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छोटे से पर हैं उस पतंग के, जाने कितने दूर तक जायेगी, पर ये तय है जाएगी जहाँ तक, इक मुकाम बनाकर आएगी|
बिटिया जो कही लक्ष्मी जाती, पराया धन क्यूँ कह दी जाती, क्या अमानत ही समझकर लाड़ किया जाता है उससे, या कलेजे का टुकड़ा सिर्फ लड़का ही होता है|