I'm Manoj and I love to read StoryMirror contents.
Share with friendsकोई गम नहीं की तूने हमे भुला दिया टूटे हुए पत्तों की तरह पर हमने आज भी हिफाज़त से रखा है तेरा रुमाल, उस किताब में रखे मोर पँख की तरह
आज फुर्सत निकाल कर शाम से बात करी, वो इतनी बुरी भी नहीं है की काम काज़ के चक्कर में उसे भुला देते है लोग |