पेशे से नहीं शौक से कवि हूँ। साहिल हूँ, पत्ता हूँ, गम का खज़ाना हूँ; मुझे घर पर ना ढूंढना दोस्त कश्ती हूँ, नग़मा हूँ, आवारा ठिकाना हूँ।।
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