VAJID ALI
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दिल को सुकून है कि वो बावफ़ा दोस्त है मेरा।

भोजन संतुलित मात्रा में,जीने के लिए खाना हो ऐसा खाना जिसे आसान हो पचाना।

मातृभाषा माँ जैसी लगती, उम्र के साथ फलती फूलती, जैसे माँ बच्चे को तालीम देती,सारे गुण ये भीतर भरती।

अपने अंतर्मन की धुन पर थिरकता चला जाऊं

मेरा परिवार, मेरा ये वतन, गुलो से महकता चमन।

सफलता कदम चूम ही लेगी, ग़र जुनून बाक़ी है भीतर तुम्हारे ।

शरारत ऐसी करो कि शराफत की झलक हो, उडो बुलंद होसलो के साथ, हाथ में फलक हो ।

सुनहरे सफर की शुरुआत ,बुलंद हौसलों के साथ |

जीवन की इस यात्रा मे कदम दर कदम जुनूं को सींचकर आगे बढ़ते रहे, हर रोज़ नई मंजिलें हैं।


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