I'm Dhanshree and I love to read StoryMirror contents.
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घेत शोध सुख चांदण्यांचा मन पुन्हा पुन्हा हे, धावते आशेच्या किनारी आपण; पण लाट निराशेची ती का बिलगते.... बावरल्या मना पुन्हा पुन्हा हेच सांगणे लाटेचे हे येणे जाणे क्षणिकचते असते....
साथ हो अपनों का तो अनजानी राह भी अपनी सी लगती है ;मगर अपने कभी अनजाने बन जाए तो जानी पहचानी राह भी अनजाने बन जाती है!!!
कुछ कहने सुनने की उम्र सी ढल गई है। अब तो बातें इशारों में होती है। और गुफ्तगू आंखों से बयां होती है।