I AM A STUDENT AND A TEACHER
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भाग्य न कर्मो का बस पुरुषार्थ होना चाहिए धैर्य साहस लक्ष्य का शब्दार्थ होना चाहिए , कर्म भूमी विरो के पर्याय हेतु ही बनी कर्म सेवा जव भी हो निस्वार्थ होना चाहिए ||| शिवानन्द चौबे ( भदोही यूपी )