@3an432ii

Kusum Lakhera
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कविता एवं कहानी लेखन में रुचि , विद्यालय में कार्यरत , सामाजिक , पर्यावरण एवं काल्पनिक विषयों के आधार पर लेखन । अन्तर्मन के भीतर की उथल पुथल को शब्दों में पिरोने का प्रयास कविता एवं कहानी के माध्यम से ।

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Submitted on 27 May, 2021 at 08:10 AM

कोशिश की स्याही से लिखते हैं जो अपनी तकदीर उनके मुकद्दर का सूरज फिर नहीं ढलता है #कुसुम#

Submitted on 21 May, 2021 at 17:46 PM

प्रेम कल कल दरिया सा बहता है ! सदियों से पाक मोहब्बत की कहानी कहता है !! #कुसुम लखेड़ा

Submitted on 21 May, 2021 at 17:40 PM

कोशिश की स्याही से लिखते हैं जो अपनी तकदीर ! बदल देते हैं फिर वह अपनी क़िस्मत की तस्वीर !! #कुसुम लखेड़ा

Submitted on 21 May, 2021 at 15:13 PM

प्रेम बंधन नहीं है ... प्रेम मुक्ति का द्वार है ! प्रेम विकार नहीं है ... प्रेम भाव उदात्त एवं उदार है !# कुसुम लखेड़ा

Submitted on 21 May, 2021 at 15:00 PM

संकीर्ण नज़रिए को न अपनाते दिल अपनों का अगर न दुखाते तो शायद कई परिवार बिखरने से बच जाते ! #कुसुम लखेड़ा

Submitted on 21 May, 2021 at 07:30 AM

जीवन के कुछ पल जो यूँ ही गुज़र जाएँगे ,देखना कैसे तड़पाएँगे ...इन पलों को कैद करना चाहा ..पर लाख कोशिशों से पाया कि बीतने वाला पल बीत ही जाता है .. उसके बाद याद ही आता है @कुसुम लखेड़ा

Submitted on 21 May, 2021 at 07:21 AM

क्या खोजते हो तुम बाहर ... वह बसता है सबके भीतर .. पर न दिखाई देगा तब तक.. जब तक माया के लगाओगे चक्कर ... जब राम नाम की शरण में जाओगे , तब प्रभु से चित्त लगाओगे @कुसुम लखेडा

Submitted on 21 May, 2021 at 06:54 AM

दृष्टिकोण में जो सबके होता विस्तार .. तो प्रत्येक व्यक्ति के भीतर प्रेम का सागर लहराता ... तो चहुँ ओर खिलखिलाता प्यार .... @कुसुम लखेड़ा

Submitted on 21 May, 2021 at 06:42 AM

काश कि नफ़रत के बीजों को हम न बोते ! तो ज़हर की फसल न लहलहाती ... प्यार की खेती से जीवन में सुख शान्ति की बहार आती !! @कुसुम लखेड़ा


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