गुजरे कल के आगोश में और शिकायत नहीं आती
शौक से वक़्त गुजर गई और वक़्त पे शौक सुधर गयी
Rosu
सुकून हासिल हो जो कहीं वो गली मुझे याद नहीं
परिंदा हूँ मैं भीगी आसमान का
गीली पलकों की गहराई अव मुझे याद नहीं।
@ruksar
ସତ୍ୟର ପଥ ଯେ ତୁ ଦେଖାଇଛୁ
ସାଥେ କେବଳ ଥା ଆମେ ଯାଉଛୁ