मेरे विशुद्ध भावों की अभिव्यक्ति है मेरी कविताएं; या यूं कहूं की मेरे पुरूषत्व के अंदर कहीं छुपी स्त्री है मेरी कविताएं।
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इश्क़ और मोहब्बत के मिलन का एक मात्र गवाह हूँ मैं ; हाँ उन दोनों की तरूणाई का प्रतीक लाल गुलाब हूँ मैं !
वो अपनी दुकान मंदिर के खुदा के नाम से चलाए जा रहे हैं ; और एक हम है जो अपने अंदर के खुदा को मारे जा रहे हैं !