Shraddha Gauhar
Literary Brigadier
AUTHOR OF THE YEAR 2019 - NOMINEE

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खर्च कर दिया खुद को जिनके लिए मैंने अक्सर , आज मुझे कुछ खाली सा बोल कर चल दिए अपने रस्ते मुझे छोड़ कर

जब साथ थे तो ख़ामोशियों को पनपने दिया दरमियान अब दूर हैं तो बात करने को तरसते हैं रात दिन यहाँ

और फिर अंत मे वो खुश हैं ये ख्याल जैसे सारे दर्द भुला देता है।

और फिर अंत मे वो खुश हैं ये ख्याल जैसे सारे दर्द भुला देता है।

जंग जब तक अंत नहीं होती तब तक ये ज्ञात नहीं होता की जंग नाप नहीं है जीत या हार का, जंग में तो बस हार ही हार होती है किसी पक्ष की कम किसी की ज़्यादा

इस सोशल मीडिया के दौर मे, मुझे आज भी किताबों में गुलाब रखने वाला इश्क पसंद है।

मेरे बालों में उतरती चाँदनी पर माँ की हल्की-सी डाँट लगी, और उसकी गूँज कुछ ऐसी रही कि आज चाँद भी बादलों में चुपचाप छुपा बैठा है अपनी चाँदनी को श्रद्धा

सबने कहा कि वो बोलती बहुत कम है और यहां मैं खामोशी पढ़ना सीख गया

People leave me saying that I am not their type that I am too emotional that I am too simple and so on... but Don't know how come with so much this and that Maa still loves me the SAME


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