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Arunima Bahadur
Literary Colonel
AUTHOR OF THE YEAR 2020 - NOMINEE

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Arunima

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Submitted on 23 Jun, 2021 at 06:38 AM

प्रियतम तुझमे जीना ऐसा, तुझको पाने जैसा है, प्रेम मगन फिर मन भी फिर राधे कृष्णा जैसा है, मन से मन का आलिंगन, जब प्रिय प्रियतम का होता हैं, प्रेम मगन फिर तो कह कण भी, झूम झूम कर कहता हैं, प्रेम में जीना, प्रेम में खोना, बस यही तो इबादत हैं, कभी खोना,कभी रोना, बस प्रेमी की आदत हैं।। अरुणिमा बहादुर खरे

Submitted on 23 Jun, 2021 at 06:37 AM

ये बरखा का आना,जैसे तेरा ही आ जाना, इन बहारों के साथ,कुछ गीतों का लाना, खो जाती हूँ कुछ तेरी यादों में, भीग बस रिमझिम बरसातों में, हर बूंदे कुछ कह जाती हैं, बस प्रेम वसुधा में भर जाती हैं।। अरुणिमा बहादुर खरे

Submitted on 23 Jun, 2021 at 06:36 AM

ये बरखा का आना,जैसे तेरा ही आ जाना, इन बहारों के साथ,कुछ गीतों का लाना, खो जाती हूँ कुछ तेरी यादों में, भीग बस रिमझिम बरसातों में, हर बूंदे कुछ कह जाती हैं, बस प्रेम वसुधा में भर जाती हैं।। अरुणिमा बहादुर खरे

Submitted on 23 Jun, 2021 at 06:30 AM

जिंदगी के हर पन्ने खोल, बस तेरा नाम लिख दू, कैसे नही तू किस्मत में, हर पल बस तेरे नाम कर दूं।

Submitted on 23 Jun, 2021 at 06:28 AM

# अद्वितीय हा, हो तुम अद्वितीय, शायद मैं भी अद्वितीय, तभी हम एक है, बंधे है एक पवन डोर से, यह अटूट प्रेम ही तो है, जो चाहता नही कुछ एक दूजे से, बस मिला देता दोनो की रूह को, हो जाता है प्रेम का आलिंगन, रूह से रूह के स्पर्श का, प्रेम के अहसास का, तभी तो अद्वितीय प्रेम है हमारा, और अद्वितीय है हम तुम।। अरुणिमा बहादुर खरे

Submitted on 23 Jun, 2021 at 06:27 AM

जीते भी है तुझको, बस तुझमे रहा करते हैं, हम तो हवाओ से भी तेरी बाते सुना करते है, न होगी तुझको ये आदत, पर लिख लिख हम तेरा नाम छिपाया करते है,

Submitted on 06 Jun, 2021 at 14:19 PM

न कुछ कहना है, न कुछ सुनना हैं, मौन की कुछ सुन आज, बस नैनो से बात करना है। कितनी होगी वो प्यारी बाते, दिल से दिल की वो बाते, आज कुछ अनोखा करना है, रूह से रूह का नाता गढ़ना हैं।। अरुणिमा बहादुर खरे

Submitted on 06 Jun, 2021 at 14:06 PM

#अश्क इन अश्को का क्या कहना, नैनो से जो बह गया, अंतस निर्मल कर गया, दिल मे प्यार भर गया, मौन हुई कुछ वाणी मेरी, पर अश्क सब कुछ कह गया, दिल से दिल की बात हुई, रूह से रूह का नाता बन गया, आज रहता प्रियतम संग संग, अश्क कमाल कर गया, जिसको खोजा गली गली, नाता उससे जुड़ गया।। अरुणिमा बहादुर खरे

Submitted on 24 May, 2021 at 22:40 PM

अपनी रूह को तेरी रूह से जोड़ दिया है मैंने कुछ ऐसा, कि न चैन तुझको हैं, न चैन मुझको हैं।।


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