None I'm a writer/Social Worker/Home Maker
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आवत जावत टूट गई पैर की पायलिया घूंघट में मुंह छिपावत आवत घर की डगरिया , आस लगा दिया की स्वर्णिम दिन की खातिर जाने कब सूरभूप बरसाएंगे अमृत बदरिया ।।