Rakhi Prajapati
Literary Captain
3
लेखन
1
फोल्लोवेर्स
1
फॉलोविंग

I'm Rakhi and I love to read StoryMirror contents.

मित्रांशी सामायिक करा

अमृत की चाह थी सबको पर काल का घूंट किसी को मंज़ूर नहीं ठीक वैसे ही शिव की चाह है सबको पर पार्वती सा तप मंज़ूर नहीं

जब तुम मेरे थे तब सिर्फ तुम मेरे थे ना किसी की चाह थी ना किसी की कमी सब कुछ खोकर भी मैं पूरी थी


फीड

लाइब्रेरी

लिहा

सूचना
प्रोफाइल