Housewife B.A
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"अपनों को समेटते समेटते अपनापन खो दिए बेहतर पाने के चक्कर में जो था उसे भी खो दिए बाकी जो बचा निकल न जाए हाथ से इसी डर में अब जीना छोड़ दिए।"
"आप जो न दे सके एसी चीज की हमें ख्वाहिश न थी,,,, जिस चीज की हमने चाह की वो पर्याप्त रहकर भी आपने न दी।"
किनारे पर आवाज लगानेवालों को क्या पता की पानी की स्रोत कितना प्रबल है, वो तो उसे ही पता ,, जो बीच मझधार में कस्ती सम्भाल रहा हो
हर पल जीयो जी भरके खुशी हो या गम कौनसी पल हो आखरि तुम्हारी जानो तुम न हम। ✍️चिन्मयी साहु। जगतसिंहपुर।
दर्द जब आंसु बन जाए तो कहर बनके टुटता है, प्यार जब बेरूखि बनजाए तो जहर से ज्यादा कष्ट दायक हो जाता है।