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छुपी क्यों है खामोशी खुद को रास्ता ढूंढ़ लो, धुंधला है जो आसमां उसे नज़रों में बसा लो,, पर अपने खोल कर आसमां पर तारो जैसे चमको, जैसा भी हो दुःख बाटकर दिल हल्का करो,,,