यादों के सफ़र में झरोखों से झांकता हुआ सपना....हर सपना बुरा नहीं होता ।।।
(शुरू)सब कब ठीक होगा............( अंत)एक दिन सब ठीक हो जायेगा.... यही जिंदगी हैं।।।
मैं टूटे हुए पंख से ऊंची उड़ान ढूंढती हूं.... सपनों का खुला आसमान ढूंढती हूं... जो अगर गिर गए तो बंजर ज़मी तक आयेंगे...जो संभल गए तो
दूर तलक़ हवा में उड़ जाएंगे...।