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Ruchi Chhabra
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Submitted on 10 May, 2021 at 17:33 PM

जब भी कहती हूं कि "मुझे भूख नहीं" तो तुम्हारी बहुत याद आती है क्योंकि "भूख नहीं है" कहने पर भी "बस थोड़ा सा खा ले" कह कर केवल मां ही खिलाती है

Submitted on 09 May, 2021 at 17:13 PM

उम्मीद का दामन मत छोड़ना दोस्त मां के आंचल के बाद एक यही तो है जो सुकून देता है..

Submitted on 09 May, 2021 at 17:04 PM

मां... आज भी जब हालातों और मुश्किलों से मन डरता है तो तेरे आंचल में छुप कर सोने को मन करता है

Submitted on 12 Dec, 2019 at 05:20 AM

गर्म हवाओं का रुख हमने मोड़ दिया हमने जो परेशानी की वजह बन गए है उन्हें दिल तो क्या दिमाग़ में रखना भी छोड़ दिया हमने

Submitted on 12 Dec, 2019 at 05:16 AM

कभी दिया बने कभी शमा कि चाहत है उन्हें रोशनी पाने की दिल दुखा बहुत जब जाना कि उन्हें तो हसरत है बस हमें जलाने की

Submitted on 12 Dec, 2019 at 05:13 AM

इतराते हुए देखा मैंने गिरगिट को बोली देखो बदलता रंग मेरा मैंने कहा इंसान से मुकाबला कर वहम दूर होजाएगा तेरा

Submitted on 12 Dec, 2019 at 05:10 AM

हमें नीचे गिराने की कोशिश की उन्होंने जी भर के हम और ऊंचे उठ गए उन्हें हर बार माफ़ करके

Submitted on 12 Dec, 2019 at 05:09 AM

ना शिकवा किया ना शिकायत की किसी बात की ना फरमाइश की कभी ऐ ज़िन्दगी तू भी जरा हद तो बता आजमाइश की

Submitted on 12 Dec, 2019 at 05:06 AM

ज़िन्दगी में कामयाबी कुछ इस कदर हासिल हुई ये दौलत ये शोहरत मानो चैन की कातिल हुई


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