BETAB AHMAD
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अबकी बार सुलह कर ले मुझ से ऐ मेरी जान, वादा करते है फिर न देंगे तुझे! किसी जालिम मां बहनों के हाथ मे

"ए मोहब्बत मैं फिर भी तुमको चाहूंगा"

"जरूरतें, जिम्मेंदारियां और ख्वाहिशें, यूं तीन हिस्सों में तनख्वाह की तरह बंट जाती है मेरी बीबी"


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