Ali Addict

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I'm Ali and I love to read StoryMirror contents.

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चंद लम्हों की तो थी जिंदगानी मेरी ... मानो जेसे मैंने सालो बीता के कुछ पल खरिद लिये हो ....

बात मज्जे की थी और वो दिल से लगा बैठे... मेहफ़िल रंगीन हो गई और वो खुद कि ख़ुशी भुला बैठे...

चाहे लाख कही जुबानी थी पर दिल न जाने ऐसी वो अनसुनी सी कहानी थी...

Ab haal kuch essa hai ki... Nind khuliti nhi ki jimedariya aa jati hai milne...

अक्सर कुछ ऐसी भी बारिश होती है जो खुशियो को गमो में भीगा कर रख देती है...

जुबान ऐसी की सब बुरा मान जाये...

उड़ान एसी की कहियो के गुरूर से जा भिड़ी...


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