@ngdozril

Moumita Bagchi
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मैं एक हिन्दी लेखिका✍, अनुवादक और कांटेन्ट राइटर हूँ। 🙂मेरी एक पुस्तक," कुछ अनकहे अल्फाज़ कुछ अधूरे ख्वाब" 2019 में प्रकाशित हो चुकी है। द्वितीय 👩‍💻पुस्तक, " माँ की डायरी" स्टोरी मिरर से अगस्त,2020 को प्रकाशित हुई है। दक्षिणी दिल्ली में निवास है। पता और दूरभाष नंबर हेतु मुझे मेल कर सकते... Read more

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Submitted on 06 Sep, 2020 at 04:29 AM

ज़िन्दगी में कुछ सीखें ठोकर खाने के बाद मिलती हैं। यकीन मानिए, वे बड़े पक्के किस्म की होती हैं।

Submitted on 07 Aug, 2020 at 15:50 PM

कुछ खामोशियाँ, बहुत शोर करती हैं। - मौमिता।

Submitted on 12 May, 2020 at 02:09 AM

इंसान का हो रुतवा पर खुदा नहीं बन सकता। शायर का भी गर हो रुतवा पर शायरी जैसा नहीं बन सकता।

Submitted on 12 May, 2020 at 02:09 AM

इंसान का हो रुतवा पर खुदा नहीं बन सकता। शायर का भी गर हो रुतवा पर शायरी जैसा नहीं बन सकता।

Submitted on 28 Mar, 2020 at 15:57 PM

हर वह शख्स जो अपनी पत्नी को रानी की तरह सम्मान देता है, पत्नी के दिल में राजा की हैसियत से रहता है।

Submitted on 28 Mar, 2020 at 15:57 PM

हर वह शख्स जो अपनी पत्नी को रानी की तरह सम्मान देता है, पत्नी के दिल में राजा की हैसियत से रहता है।

Submitted on 28 Mar, 2020 at 10:49 AM

तुमको न पाया कभी, पर तुम्हें खोने से डरती हूँ, दिल में अजीब सी बेकरारी तुम पर दखल होने से इतरातीहूँ

Submitted on 28 Mar, 2020 at 10:49 AM

तुमको न पाया कभी, पर तुम्हें खोने से डरती हूँ, दिल में अजीब सी बेकरारी तुम पर दखल होने से इतरातीहूँ

Submitted on 28 Mar, 2020 at 10:40 AM

यादें तुम्हारी, उस ढीठ बच्चे की तरह है, कितना भी भगाऊं गलबाही डाले हँसता है।

Submitted on 28 Mar, 2020 at 10:40 AM

यादें तुम्हारी, उस ढीठ बच्चे की तरह है, कितना भी भगाऊं गलबाही डाले हँसता है।

Submitted on 24 Mar, 2020 at 15:28 PM

नियमों का पालन केवल बेवकूफ करते हैं, शातीर लोगों तो उनको तोड़ने का उपाय ढूंढते हैं।

Submitted on 23 Mar, 2020 at 10:54 AM

यूं तो हमने इंसान बहुत देखें हैं, लेकिन इंसानियत किसी किसी में ही देखा है। असली मानव वो ही हैं कि जिनमें अभी मानवता शेष हैं, बाकी सब होमोसेप्यिंस हैं।😊

Submitted on 22 Mar, 2020 at 12:24 PM

कविता लिखना नहीं होता है आसान, अतः शब्दों को पंक्तिबद्ध ही रह जाने दो। सुर, ताल , लय, गेयता से परे उन्हें कुछ बिम्ब ही बने रहने दो। मेरे अल्फाजों को अल्फाज़ ही रहने दो, उन्हें कोई कविता का नाम न दो।

Submitted on 22 Mar, 2020 at 12:16 PM

मेरो अलफाज़ो को अल्फाज़ ही रहने दो उन्हें कोई कविता का नाम न दो। ये अभिव्यक्ति हैं कुछ दबे, कुचले अहसासों की, उन्हें अविरल ही बह जाने दो।

Submitted on 21 Mar, 2020 at 13:38 PM

पानी जैसे जीवन का पर्याय है, वैसे ही तू इश्क का पर्याय है।

Submitted on 20 Mar, 2020 at 14:29 PM

जंगल है हमारे जीवन का अंग, देता हमें भोजन और इंधन, इसलिए बचाव करो उसका, वरना सभ्यता में रह जाएगा केवल काॅन्क्रीट का जंगल। पौधे लगाओ, पेड़ उगाओ।

Submitted on 19 Mar, 2020 at 17:29 PM

खुशियों की तलाश में कहीं न जाइए जनाब! कभी किसी दुःखी चेहरे में खिलखिलाहट लाने की वजह तो बनकर देखिए!

Submitted on 19 Mar, 2020 at 09:14 AM

"खुशियाँ, दर्द रूपी नाटक में बहुत कम आने वाला एक सीन है ।"

Submitted on 17 Mar, 2020 at 10:44 AM

पूछूँ मैं यह सवाल, अपनी जिन्दगी से बारंबार, वैसा क्यों नहीं होता, जैसा कि हम चाहते है?

Submitted on 16 Mar, 2020 at 10:46 AM

तुम सागर, और मैं एक छोटी सी सरिता, तुम में विलीन होकर, अपना अस्तीत्व खोना चाहती हूँ।

Submitted on 16 Mar, 2020 at 09:52 AM

एक महासागर के समान थे तुम जिसमें था समाया मेरा संसार सारा। तुम गए तो सब गया, बचा केवल जीवन, उर्मियों सा हाहाकार भरा। पर सागर नहीं रखता है अपने पास कुछ तो फिर लौटा दो न वे गुजरे हुए अनुराग के पल कुछ।

Submitted on 16 Mar, 2020 at 06:19 AM

जो कल तक हमारे थे, वह आज किसी और के हो गए! जिस दिल में रहते थे हम कल तक, वहाँ अब किसी और का ठौर हो गया।

Submitted on 15 Mar, 2020 at 13:23 PM

न केवल जानकारी, बल्कि हमें दुनिया की सैर करवाती हैं किताबें, मानवता के विषय में भी ज्ञा न दिलवातीहैं किताबें, दुःख में मनबहलाव करती हैं, ये किताबें, फिर बतौर गिफ्ट, हमारी अलमारी की शोभा बढ़ाती हैं, किताबें। धनी भी निर्धन है, अगर न पढ़ी उसने किताबें।

Submitted on 14 Mar, 2020 at 18:13 PM

दिल की गली में जब होवे अरमानों की हत्या, आंखें बहुत बरसें हैं, बेबस और निहत्था।

Submitted on 14 Mar, 2020 at 16:10 PM

अहं है वह मारणास्त्र, जो करे सभी रिश्तों की हत्या!

Submitted on 13 Mar, 2020 at 17:02 PM

यह जिन्दगी अगर मेरी है, तो मेरी इच्छानुसार क्यों नहीं चलती?

Submitted on 12 Mar, 2020 at 08:11 AM

सोना एक आवश्यक प्रक्रिया है जहाँ अनपूरे सभी सपने यूँ ही पूरे हो जाते हैं। तन के साथ-साथ मन को भी सुकून देने के लिए सोना बहुत जरूरी है।

Submitted on 11 Mar, 2020 at 09:46 AM

चलचित्र जीवन की आलोचना होती है। भले ही, उसमें थोड़ा नाटक और अतिरंजना होती है, पर उसका काम है जीवन को प्रभावित करना, बदले में वह स्वयं भी जीवन से प्रभावित होती रहती है।

Submitted on 10 Mar, 2020 at 15:09 PM

आओगे जब तुम मनमीत, मित्रमंडली के साथ खेलने होली, तब मैं भी सहेलियों संग छोड़कर सारी हँसी ठिठोली, नयनों में सजाकर प्रेम रंग खेलूगी तुम संग प्रीत की होली

Submitted on 09 Mar, 2020 at 08:42 AM

#अहसासों की होली देख था इक चेहरे पर अनुराग का गहरा गुलाबी रंग आज खेलेंगे होली उन्हीं अहसासों के संग। लाल, पीला, हरा, नीला, बैंगनी, सबको किए जाता था जो भंग, मल-मलकर धोने पर भी छूट न पाया वह प्रीत का गुलाबी रंग।

Submitted on 29 Feb, 2020 at 02:42 AM

कुछ रिश्तों के नाम नहीं होते, रक्त संबंध या रस्मों- रिवाज़ों के बंधन-जैसा कुछ भी नहीं होता हैं उनमें। पर, फिर भी, बड़े अनमोल होते हैं, वे अनाम से रिश्ते। कुछ-कुछ कृष्ण और कृष्णा के रिश्ते जैसा! पाँच- पाँच शूरवीरों की व्याहता होने पर भी, कृष्णा को

Submitted on 22 Feb, 2020 at 12:00 PM

दौलत की कोई अहमियत नहीं उनके लिए, जिनके पास है यह बेशुमार। परंतु भूख से बचने के लिए अपनी प्यारी संतान बेचने को मजबूर माता-पिता के लिए, शायद पैसा बड़ा अहम होता है। स्थान, काल और पात्र के अनुसार एक ही शब्द के प्रतिमान बदल जाते हैं।

Submitted on 22 Feb, 2020 at 11:59 AM

दौलत की कोई अहमियत नहीं उनके लिए, जिनके पास है यह बेशुमार। परंतु भूख से बचने के लिए अपनी प्यारी संतान बेचने को मजबूर माता-पिता के लिए, शायद पैसा बड़ा अहम होता है। स्थान, काल और पात्र के अनुसार एक ही शब्द के प्रतिमान बदल जाते हैं।

Submitted on 12 Feb, 2020 at 18:21 PM

आओ बंधुओं, आज के दिन जी भर भरकर सब गले मिले एक दूजे का गम साथ मिलकर खुशियों में तब्दिल करें। आप सबका साथ यदि हो तो, फिर क्या है शिकवे और क्या गिले? हंसी ठहाकों से गूंज उठे फिजा भी, चमन में खिलखिलाहट भरें।

Submitted on 12 Feb, 2020 at 18:15 PM

A hug a day, Keeps all the depression away.. ------------ So keep hugging, Believe me, Lot of us are craving for one!

Submitted on 10 Feb, 2020 at 13:03 PM

यदि तुम भी होते एक टेडीबेयर सरीखे, बाहो के घेरे में छुपाकर रखती तूम्हें नित्य जाने न देती!

Submitted on 10 Feb, 2020 at 11:18 AM

कुछ अल्फाज़ बड़े खोखले होते हैं, कहनेवाले जुबान की शख्सीयत जैसी ही।

Submitted on 03 Feb, 2020 at 03:16 AM

फुरसत के चंद पल भी नहीं है, आपके पास इतना ही मसरूफ रहा करते हैं, और एक हम हैं, जिनके पास दूजा कोई काम ही न होता है अकसर, सिवाए आपको याद करने को!!

Submitted on 25 Jan, 2020 at 16:45 PM

तू पतंग है और मैं तेरी चरखी और डोर! साथ-साथ बंधे है प्रेम-सूत्र में, तब भी है कितने दूर! तू विचरे आसमान में, पर किया न कभी रूख घर की ओर! मेरा रूख जबकि सदा धरती की ओर पर उड़ने दूँ तुझे उस खुले आसमान में, जिसका न कोई ओर या छोर।

Submitted on 25 Jan, 2020 at 16:38 PM

दूरियाँ, यह एहसास करवाती हैं कि-- दुनिया के किसी हिस्से में, यदि हमारे ज़िक्र मात्र से कोई दिल, पलभर के लिए धड़कना भूल जाता है, तो, उस पल और उन धड़कनों दोनों पर , केवल हमारा ही राज है।❤😍

Submitted on 25 Jan, 2020 at 16:34 PM

अल्फाज़ कहाँ बयाँ कर पाते हैं अहसासों को? जज़बात तो खामोशी के जरिए ही महसूस हैं!

Submitted on 06 Jan, 2020 at 17:13 PM

एक अव्यक्त-सा रिश्ता था, उनके बीच, खामोशी में लिपटे हुए--- बहुत कुछ अनकहा-सा!

Submitted on 06 Jan, 2020 at 17:05 PM

तकदीर का क्या भरोसा, शायद हमें कभी मिला भी दे! अधूरे ख्वाबों को हकीकत में तब्दिल कर भी दे। लम्हा लम्हा यही गुजारिश है अब कायनात से, कि शिद्दत से की गई मोहब्बत-- यूं बेजा न साबित हो!

Submitted on 29 Nov, 2019 at 03:51 AM

কোনো কিছু যখনি হয়ে যায় শেষ, তারপরেও রয়ে যায় কিছু তার রেশ।


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