लेखक नही , कवि नही , छंद न लिखने आए लिख देता हूं वो ही जो शारदा देती लिखाए
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जो गुलाब की पंखुड़ियों से नही , कर सकता है काटो से भी मोहब्ब्त वो ही जिंदगी में घोल सकता है प्यार का मीठा शर्बत