दर्द से दिल बंजर बन गया है ।
मुफ़्त में दिल खंजर बन गया है।
भागते हुए ये जिन्दगी के लम्हों को मैं अपने दिल की धड़कनों के साथ कैद करना चाहती हूं।
गुमसुम सी रहने लगी हूं मै अब
वक्त ने कुछ ऐसा मुझे पे सितम ढाया है , चाहत नहीं है अब दिल ने
ऐसा जिंदगी में जख्म खाया है
आग दोस्त भी है दुश्मन भी है
आग जैसा कोई नहीं इस दुनिया में
ये खाना भी पकाती है
ये जिंदगी भी जलाकर बर्बाद करती है
आग जैसी ताकत किसी में नहीं
इस दुनिया में ये दोस्त भी है और दुश्मन भी हैं
ये खाने को पकाती भी है
ये इन्सान को जलाकर मिटाती भी है