शीर्षक :- धावताना स्पर्धेच्या युगात धावतांना अपयशही येते कधी दारी अदृश्य खडतर प्रवासात करावी एकदा मनाची वारी
उसके जिस्म पर उसके रुह पर उसके आसू के कतरे पर पहला नाम तो मेरा था बेशक उसने बनाए होगे मकान बहोत पर उसके ख़ाबो के घर पर नाम तो मेरा था
रूह के हर कतरे में सामील तू धड़कन से निकालू कैसे तू मेरी नहीं में तेरा नहीं ये बात दिल को समझाउ कैसे
तू ज़हर ये काली रातों की तुझे हर रोज नशे में भुलाना चाहू भूलते वक़्त फिर तेरी याद आ गई रुक और एक जाम का प्याला पी लू
ये हलकासा दर्द गहरे मुस्कान मे बदल जाये ये सीने की चोटे मरहम मे बदल जाये इतनी सी तमन्ना हे जिंदगी, मौत आने पर उसके आसू फुलो मे बदल जाये |