Jiya Prasad
Literary Brigadier
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वो सुबह कभी तो आएगी... 💫 पाठक मुझे लिखें- (maybejiya@gmail.com)

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अलग हो जाना किसी की यादों से ख़ाली हो जाना नहीं होता!

हम सब रौशनी और अंधेरे के बीच की कगार पर रहते हैं। कोशिश रहती है कि किसी में भी पूरी तरह न डूब जाएं।

मुझे फ़िक़्र है कि उसे मेरी फ़िक़्र है। वरना फ़िक़्र की कोई बात नहीं!

किसी मुल्क़ में रहने के लिए उस मुल्क़ की 'मुल्क़ियत' की ज़रूरत होती है, बस्स!

मिट्टी की नस्ल मिट्टी होती है, उसका दस्तावेज़ नहीं बनता।

Don't worry, your shade is also enough to live with. You can't be demanded in love.

Smell your beloved, it can give you new life and energy.

वह जिस पल नज़दीक बैठा, उस पल दुनिया ग़ायब सी हो गई थी। #पहलाप्यार

इश्क़ में 'उसकी' सूरत देखना भी एक तिलिस्म है।


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