Garima Mishra
Literary Brigadier
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I was Born and brought up in Jaynagar, Bihar, currently based in Delhi where I'm pursuing my Bachelor's degree. I have always been an avid reader and started writing at a young age, drawn to the power of words to transport readers to different worlds and experiences. My writing often focuses on... Read more

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पीड़ा देती प्रेम तुम्हें, तुम प्रेम समझ ना पाए प्रेम का अर्थ समर्पण है पीड़ा तो मोह से आए।।

यकीनन दूरियां रास्तों की नहीं, दिलों की होती है जब शहर दूर थे तो हम तेरी पनाहों में जिए अब करीब हैं, तो निगाहों में भी नहीं आते।।

ये इश्क़ हमें किस मोड़ पे लाया है तुमसे मिलने की चाहत में बड़ी दूर ले आया है हम चाहते तो बन जाते रकीब जाने कितने बस एक तेरी हसरत में दिल कितनों का तोड़ के आया है जाने ये इश्क़ हमें किस मोड़ पे लाया है।।

तुम जब भी लब खोलोगे और उनसे लफ्ज़ों में कुछ बोलोगे धड़कनों की भी एक रफ्तार होगी नजरें तुम्हारी उनके नज़रों में गिरफ्तार होगी चाहोगे तो तुम नज़रे उनसे चुराना लेकिन उस लम्हे हया की पार हर दीवार होगी और भूल जाओगे तुम क्या कहेगा ज़माना क्योंकि कुछ चीज़ें आज़ाद रहती हैं, और आज़ाद ही रहती हैं।।

किसी का कंधा नहीं मिला हमें सर रखकर रोने को ना कोई ऐसा ही आया जो लगा सके अपने सीने को ना अश्क बहे, ना इश्क़ हुआ, ना मिला कोई फिर ऐसा खोने को बस रातें तबाह हो गई, और क्या ही बुरा हुआ इश्क़ में होने को

कभी लगे तुम्हारे मन को पराजित होने का भय तुम अधरों पर मेरा नाम सजाना नयन मूंद तुम अन्तर्मन में मेरी छवि बनाना विश्वास अटल हो जीवन भर ये तेरे मन में, प्रेम तुम्हारा विजय रहेगा अंतकाल तक मेरे मन में।।

तुमसे मिलने पर जाना मैंने प्रेम कोई भाव नहीं, बल्कि प्रेम तो स्वभाव है जो सदैव से तुम्हारा रहा, और तुम्हारे जाने के बाद अब मेरा भी है।

मैं तुम्हें लिखती हूं लोग मुझे पढ़ते हैं मेरे शब्दों का इससे बेहतर तकाज़ा क्या होगा?! मैं आह भरती हूं, लोग वाह कहते हैं मेरे दर्दों का इससे बेहतर तमाशा क्या होगा?!

मैं कलयुग में भी तुम्हारी सीता बन जाऊंगी तुम मेरे लिए राम के भांति धनुष उठा लेना मैं छोड़ आऊंगी अपने मन के मिथिला को तुम अपने हृदय के अयोध्या में मुझे बसा लेना


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