Gayatri Yadav

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हर तरफ तेरी चाहतों का शोर है , ये जादू है या कुछ और है , बेताबियाँ बढ़ रही है मेरी , या मेरी धड़कनों का शोर है, पायलों की छनक में भी ये शोर है, तेरी यादों का ना अब कोई छोर है , मेरी हर धड़कनों में अब शामिल है tu, शायद ये मेरी खामोशियों का शोर है

किसी के अच्छा या बुरा होने की परिभाषा हम क्यों बुनते हैं, हमनें अपना जीवन जिया है उसका तो नहीं, हमने तो अपने परिश्रम देखें हैं उसके तो नहीं

किसी के अच्छा या बुरा होने की परिभाषा हम क्यों तय करते हैं, हमने अपना जीवन जिया है उसका तो नहीं, हमने तो अपने परिश्रम देखें हैं उसके तो नहीं।

ये मौन मेरा बहुत ही पसंदीदा शब्द है, जो मुझे लोगों को समझने की और खुद को परखने की क्षमता प्रदान करता है

मेरी अंखियों के झरोखों में तेरी यादों के साए हैं ,तुझसे ही मेरा राब्ता तुझसे ही मेरी वफाएं हैं , है ख्वाहिशें मेरी तेरे साथ गुप्तगू कर आए, है ख्वाहिशें मेरी तेरे साथ गुप्तगू कर आए, हकीकत में ना सही ख्वाबों में तुझसे रूबरू हो जाए Gayatri

गावों की वो सुबह जो दे दिलों को सुकून, गावों की वो शाम जहां ढलते सूरज की सुन्दरता का वर्णन कोई कवि ही कर पाए, वो लहलहाती फसलें जिनको देख कर दिल खुश हो जाय,इन सब चीज़ों को शायद हम कुछ पाने की ख्वाहिश में बहुत पीछे छोड़ चुके हैं।

लोगों को समझना शायद मेरे बस की बात नहीं, लोगों को समझना शायद मेरे बस की बात नहीं जितना मैं सोचती हूं मैंने लोगों को पहचान लिया है या जान लिया है , लोगों का एक नया रूप मेरे सामने आता है, और मैं फिर से अपने उसी नाव पर सवार होकर लोगों को पढ़ने की कोशिश में लग जाती हूँ, और शायद मैं कहीं न कहीं ये जानती भी हूं कि मेरी इस यात्रा का कोई छोर नहीं है

आसमां ऊंचा है मेरे ख्वाबों का, उसे पाने की जद्दोजहद जारी है, शायद कामयाब हो जाऊँ एक दिन, जिस दिन लगे उसे अब इसकी बारी है Gayatri

थी तमन्ना मुझे की उसे आगोश में ले लूं, उसकी धड़कनों को सुनूं, लेकिन ओ वक्त की रेत की तरह फिसल गया


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