|| कागद हा कलमाविना अपुरा राहतो, अन् ह्या लेखणीतून मी स्वप्न उद्याचे पाहतो....||
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डर... डर ही तो एक कड़वा सच है जिंदगी का, जहां हर मोड़ पर वो अपने रंग दिखाता है | इसलिए डरना जरूरी है जिंदगी में, क्योंकि डर हमें गिरने से पहले संभलना सिखाता है 😊 | - © हर्षवर्धन मोहन खंडागळे.