@exhm3mut

Vijay Kumar उपनाम "साखी"
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सत्यम शिवम सुंदरम छायावादी,व्यंगात्मक,कविता शायरी,कहानी लिखना

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Submitted on 22 Apr, 2021 at 10:20 AM

गर हमको पृथ्वी मां को बचाना है जीते जी पांच पेड़ जरूर लगाना है मरने पे लकड़ी का भार भी न होगा पृथ्वी पे दिखेगा सुंदर नजराना है दिल से विजय

Submitted on 20 Apr, 2021 at 12:46 PM

सबका भरण-पोषण करती है मां बन सबका ध्यान रखती है जीवन निर्वाह हेतु धान्य देती है ये प्यारी धरती मां कहलाती है दिल से विजय

Submitted on 13 Apr, 2021 at 11:22 AM

सबका भला करता रब पर इंसान समझे न तब भगवान भीतर ही है,सब पर हमारा मन माने न तब दिल से विजय

Submitted on 13 Apr, 2021 at 10:53 AM

सबका भला करता रब पर इंसान समझे न तब भगवान भीतर ही है,सब पर हमारा मन माने न तब दिल से विजय

Submitted on 12 Apr, 2021 at 10:48 AM

सबको देता गया,सब वो है ईश्वर,खुदा,रब दिल से विजय

Submitted on 11 Apr, 2021 at 02:50 AM

जिंदगी की आखरी रात से पहले मिल लो खुद से,कयामत से पहले दिल से विजय

Submitted on 10 Apr, 2021 at 06:33 AM

जिंदगी में वो ही चराग जलते है जो जान को हथेली पे रखते है जो समस्याओं से घबरा जातें है, वो ज्वालामुखी होकर भी बुझते है दिल से विजय

Submitted on 09 Apr, 2021 at 13:52 PM

जीने के बहाने चार है मुर्दे के बहाने हजार है तुझ पे निर्भर है,साखी, क्या लेनी जीवन पाती फ़लक पर जाना है,या, करना मुर्दे सा व्यवहार है दिल से विजय

Submitted on 09 Apr, 2021 at 13:44 PM

जीने के बहाने चार है मुर्दे के बहाने हजार है तुझ पे निर्भर है,साखी, क्या लेनी जीवन पाती फ़लक पर जाना है,या, करना मुर्दे सा व्यवहार है दिल से विजय


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