Rukhsar Parveen

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Bahraich U.P

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सिर्फ़ औरत नहीं कुछ मर्द भी होते है औरतों की तरह ईर्ष्यालु उनको बर्दाश्त नहीं की कोई औरत उनको पछाड़ दे चाहे वो ज़िंदगी की रेस हो या कार की उनको किसी औरत से हारना पसंद नहीं ऐसे दुष्ट प्रवृत्ति के पुरुष जो महिलाओं को सम्मान देने के बजाए उनसे ईर्ष्या करें ऐसे पुरुष मेरी नजरों में पुरुष ही नहीं है बल्कि......

चाह समंदर की है और कतरा भर भी औकात नहीं

इश्क़ दरिया है मुंतजिर है तुम्हारा रात कट गई कांटों पे इंतेज़ार है तुम्हारा Rukhsar Parveen

रिश्तेदार गैरों की कामयाबी के किस्से स्टेटस पर लगाते हैं और अपनों की कामयाबी पर जल भुन कर कबाब हो जाते हैं चेहरे बेनकाब हो जाते है। Rukhsar parveen


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