I'm Atiya and I love to read StoryMirror contents.
Share with friendsना जाने कब ये मेरी ज़िन्दगी की शाम ढल गई,,,,बड़ी मुद्दत के बाद अभी तो मैंने जीना सीखा था। Atiya rizvi
मन की सुंदरता कौन देखता है लोग तो बस बाहर की प्रतिछाया देखते है,, सुंदरता की तो परिभाषा ही अलग है ,हो सफेद रंग तो सुंदर रंग हो कला तो लोग कुरूप हि कहते है
हज़ारों आवाजे दी इस दिल ने तुम्हे,,कभी तन्हाई में कभी अंधेरे में, काश सुन लेते इस दिल की आवाज़ों को, लब तो खामोश कल भी थे और आज भी है।