Atiya Zehra

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तारीफ़ है इस दुनिया की के लोग वफा को ठुकरा कर बेवफा पे जान देते है।

वक़्त की अहमियत को भला वो क्या जाने। जिन्होंने कभी वक़्त के साथ जीना नहीं सीखा। Atiya rizvi

ना जाने कब ये मेरी ज़िन्दगी की शाम ढल गई,,,,बड़ी मुद्दत के बाद अभी तो मैंने जीना सीखा था। Atiya rizvi

खामोश रहो महफूज़ रहोगे,,,,,,हज़रत अली

मन की सुंदरता कौन देखता है लोग तो बस बाहर की प्रतिछाया देखते है,, सुंदरता की तो परिभाषा ही अलग है ,हो सफेद रंग तो सुंदर रंग हो कला तो लोग कुरूप हि कहते है

हज़ारों आवाजे दी इस दिल ने तुम्हे,,कभी तन्हाई में कभी अंधेरे में, काश सुन लेते इस दिल की आवाज़ों को, लब तो खामोश कल भी थे और आज भी है।

कब शायरों की महफ़िल में हमारा दिल लगता था,,,तेरी मुहब्बत में कुछ कहा और वो शैर बन गए।

तेरी बेरुखी से कहा सुधरे हम,,कल भी तेरे दीवाने थे और आज भी हैं।। atiya zehra

मीला वहीं जो नसीब में था,,,और नसीब तो खुदा बनाता है।


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