नेहा प्रसाद
Literary Captain
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मैंने अपने जुबां पर आये बातों को कागज पर उतारा है। जानती नहीं कितनी गहराई होंगी इन शब्दो में! मैंने तो बस वर्तमान को लिखना ✍ जाना है

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चल चला चल नाइट शुरूआत कर तू नए साल में तू भले पुरानी राह है ये अब इसका बादशाह है तू !

क्या है लिखा मेरे भाग्य में क्यों है तू यूं चुप खड़ा..! बवंडर में हूँ उलझी मैं किस राह मुझे तू ले जा रहा??

सत्य की नींव मजबूत होती है, कभी डगमगाती नहीं और झूठ कभी इससे आंखे मिला नहीं सकता।

लोग जात में छोटे-बड़े हो या हैसियत में उम्र में छोटे-बड़े हों या कद में आदर-सम्मान सभी की करनी चाहीए।।

तुम्हें ख़ुद पर आत्मविश्वास होनी चाहिए, क्योंकि इस संसार में तुम्हारा सच्चा मार्गदर्शक स्वयं तुम ही हो।

मन की शांति अधिक आवश्यक है, उनके लिए जो हर रोज जीते है कोलाहल में ।।

रख विश्वास खुद पर, कोई तूफान तेरा कुछ नही बिगाड़ पाएगा। जहां डगमगाया तू जरा सा भी, देख तुझे वो जड़ से उखाड़ ले जायेगा।।

रंग बदलने वाले भी एक रंग में रंग जाते है, होली आने पर लोग फिर से मिल- झूल जाते है।

अपने गुरु के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए जो सही रह दिखाते है और आपको एक अच्छा ईशान बनाते है


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