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सरल है बहुत सरल है:मेरे हर प्रश्न का जवाब बहुत मुश्किल है:हाँ कहना नामुमकिन है :उनका ज़रा भी झुक जाना कितना अच्छा है :उनका एकतरफा व्यवहार सच मे कितना आसन होता है सच को लिखना लेकिन हैरानी है इस बात की कि कितना मुश्किल और नामुमकिन है उसे व्यवहार मे लाना।
"मन के काले बादल पता नहीं कब छटेंगे कब होगा पहला सा आसमान कब होंगे हम अपनी जमीं पर प्रश्न एक नहीं हज़ार है। "
"ज़िन्दगी का पाठ बिना याद किए ही याद रहता है उम्र भर लेकिन जब किताब खोलकर कोई पाठ याद करने की कोशिश करते है तो याद नहीं होता इसे ही कहते है ज़िन्दगी का पाठ। "
"शाम ढल तो रही थी लेकिन उजाला कम नहीं हुआ पता नहीं क्यों? लेकिन यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आशा अभी भी उसमें मौजूद थी। "