कविता लेखन एक साधना है और मैं एक साधक हूँ। पहली कविता कक्षा 10वीं में खेल खेल में लिखी और वही से कविता लेखन में रुचि जाग्रत हुई। कवि अपने दादा से समसामयिक विषयों पर चर्चा करते और उसे अपनी कविता का विषय बनाते।
जहां न पहुँचे रवि,वहाँ पहुँचे कवि। जहां न पहुँचे कवि, वहाँ पहुँचे अनुभवी। सुन्दर लाल डडसेना मधुर