शब्द रूपी मोती से। वाक्य रूपी माला बनाई।। मेरे लिखे शब्दों में हैं। अर्थ रूपी समंदर समाई।।
अज्ञानता का लोप हो जाएगा। जब मन पूर्णतः कृष्ण
बदलते साल के साथ मेरा प्यार भी बदल गया। जो कहता था, जीते जी कभी अलग न होंगे, वो यार ही बदल गया। मेरे लिए तो मानो ये संसार ही उजड़ गया। अब है मलाल, के क्यों ये साल गुजर गया।