कलाकार हूँ, सुरों को साधना, रंगों को भरना, जज़्बात कागज़ पर रखना.....अच्छा लगता है।
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ख़ुदा भी सोंचता होगा हक़ीक़त देख दुनियां की, बनाया था जो मैंने आदमी, क्या आदमी निकला!! -----––- Ragini singh.-------