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मकड़जाल भाग 11
मकड़जाल भाग 11
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© Mahesh Dube

Thriller

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मकड़ जाल भाग 11 

 

डॉ सान्याल सोफे पर बैठा कोई पेय चुसक रहा था। मिसेज शेट्टी सामने के सोफे पर पालथी मारे बैठी थी। उनके चेहरे पर बीमारी के कोई चिन्ह नहीं थे। विशाल को देखते ही दोनों हड़बड़ा गए। डॉ ने फौरन उठना चाहा तो विशाल ने होलस्टर से अपनी सर्विस रिवाल्वर निकाल ली 

"हाथ ऊपर, मिस्टर नकली डॉक्टर" वो क्रूर स्वर में बोला

सान्याल ने चुपचाप हाथ उठा दिए। 

और बोलिये मैडम! अब कैसी तबीयत है? विशाल ने उपहासपूर्ण स्वर में पूछा तो मिसेज शेट्टी का सिर झुक गया। अचानक विशाल के सिर पर मानो पहाड़ टूट पड़ा वह त्योराकर नीचे गिरा और गिरते गिरते उसने पाया कि शेट्टी की कमउम्र नौकरानी उसके पीछे आन खड़ी हुई थी जिसने हाथ में मसाला पीसने का बट्टा थाम रखा था। विशाल को पता भी नहीं चला कि कब उसकी चेतना लुप्त हो गई। 

       न जाने विशाल कब तक बेहोश रहा। जब होश आया तो उसने पाया कि उसके हाथ पीछे बंधे हुए थे और वह सोफे पर करवट के बल पड़ा था। डॉ सान्याल गोद में उसकी रिवाल्वर लिए बैठा था। मिसेज शेट्टी और नौकरानी किसी मंत्रणा में लिप्त थे। विशाल की कराह सुनकर वे इसकी ओर आकृष्ट हुए।

एक ऑन ड्यूटी पुलिस अधिकारी के साथ ऐसा करना आप लोगों को महंगा पड़ेगा, वह गुस्से से बोला

शांत हो जाओ बच्चे, सान्याल बोला, महंगा सस्ता तब पड़ेगा जब तुम बचोगे! 

विशाल दांत पीस कर रह गया। 

वे तीनों शांत होकर बैठे रहे। लग रहा था जैसे वे किसी का इंतजार कर रहे हों। 

विशाल अपने बंधन ढीले करने को कसमसाया तो सान्याल ने चौंक कर उसकी ओर देखा और बोला, यार! हमने तो काफी चतुराई से तुम्हे बेवकूफ बना दिया था पर तुम लौट कैसे आये? 

विशाल बोला, मैं तो तुम लोगों के जाल में फंस ही चुका था पर तुम्हारी बदकिस्मती से मेरा मोबाइल बज उठा जो संयोग से गिर पड़ा। उसे उठाते वक्त मेरी नजर पलंग के नीचे पड़े उस स्कार्फ और गॉगल पर पड़ी जिसे पहनकर जाते मैंने थोड़ी देर पहले मैडम को देखा था तो मैं समझ गया कि तुम लोग मुझे मूर्ख बना रहे हो। बस मैं लौट आया। 

पर तुम ताला खोलने में कैसे सफल हुए? दरवाजे पर तो कीमती नाइट लैच लगा हुआ है?

मैंने जब शू रैक से अपनी कैप उठाकर पहनी तो मेरी नजर चाबी के एक गुच्छे पर पड़ी जो बगल में ही रखा हुआ था। नौकरानी की तरफ मेरी पीठ थी मैंने टोपी के साथ गुच्छा भी उठा लिया और बाहर निकल गया। सौभाग्य से उस गुच्छे में में मेन डोर की चाबी थी। उसी के सहारे  मैं थोड़ी देर में वापस आ धमका। 

      मिसेज शेट्टी ने आग उगलती नजरों से नौकरानी को देखा तो वह शर्मिंदा हो गई और उसने सिर झुका लिया। 

मैडम! आपकी एक्टिंग की मैं दाद देता हूँ। विशाल बोला

       वह किसी तरह इन्हें बातों में लगाए रखना चाहता था क्योंकि उसने धीरे-धीरे अपने हाथों को ढीला करने की कोशिश जारी रखी थी वह नहीं चाहता था कि किसी का ध्यान इस बात पर जाए। 

शायद तुम साउथ की फ़िल्में नहीं देखते, सान्याल बोला, मैडम वहाँ की अभिनेत्री रह चुकी हैं! दिव्या शान्ति!

मिसेज शेट्टी ने मुस्कुराकर गरदन को हल्का खम दिया मानों कोई पुरस्कार ग्रहण किया हो। 

तब तक विशाल पीठ पीछे हाथ खोल चुका था। उसने पूछा, ये डॉक्टरी सेटअप कैसे लगा लिया? 

अरे! मैं असली डॉक्टर हूँ।  नीचे ही मेरी डिस्पेंसरी है। मैं सच में इनका फॅमिली डॉक्टर हूँ। 

डॉक्टर होकर ऐसे काम करते शर्म नहीं आती? विशाल बोला तो डॉक्टर का चेहरा लाल पीला होने लगा विशाल ने उसे और उत्तेजित करने के लिए एक गाली दी तो वह खुद पर काबू न रख सका और तेजी से उसपर झपटा इधर विशाल भी एकदम तैयार था उसने बिजली की रफ़्तार से लात चलाई और कूद कर खड़ा हो गया। डॉ सान्याल कराहता हुआ पीछे सोफे पर गिर पड़ा। अचानक उसके हाथ विशाल की रिवॉल्वर लग गई  पर इसके पहले कि वह गोली चला पाता विशाल ने उसपर जम्प लगा दी और दोनों जमीन पर गुत्थमगुत्था हुए गिर पड़े। अचानक सान्याल के हाथों में पकड़ी रिवाल्वर से गोली चल गई और संयोग वश जाकर सीधे मिसेज शेट्टी की नाक की हड्डी से टकराई उनका चेहरा पलक झपकते खून के दरिया में बदल गया और उनके प्राण पखेरू उड़ गए। नौकरानी चीखती हुई भीतर भाग गई। डॉ सन्न सा पड़ा रह गया तब तक दरवाजा खुला और जिस व्यक्ति ने भीतर कदम रखा उसे देखकर विशाल को भी मानो लकवा मार गया और उसके दिमाग ने भी काम करना बंद कर दिया।

कहानी अभी जारी है ......

पढ़िए भाग 12 

रहस्य कथा

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