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© Yogesh Suhagwati Goyal

Children Others

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मुझे आज भी अच्छी तरह से याद है | उस साल दिवाली ११ नवम्बर की थी | उन दिनों हमारा परिवार किराये के घर में रहता था | हमारा पता था ४ य १४ जवाहर नगर जयपुर | जवाहर नगर से सटा हुआ ही राजा पार्क का क्षेत्र है जहाँ पर हैप्पी नर्सिंग होम स्थित है | साफ़ सुथरी और सुरक्षित डिलीवरी के लिए, हमको इसी नर्सिंग होम का नाम सुझाया गया था | हमारे घर के पास भी पड़ता था | यहीं हमारी छोटी बिटिया गरिमा उर्फ़ नोनू का, डा. अनीस अरोरा के हाथों, धन तेरस से ठीक २ दिन पहले, यानि ७ नवम्बर १९८५ को जन्म हुआ | हमारी पत्नी मंजू और नोनू को नर्सिंग होम से धन तेरस के दिन छुट्टी मिली | घर के सभी सदस्यों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था | घर में लक्ष्मी जो आई थी |


नोनू के जन्म के वक़्त, मैं भारतीय नौवहन निगम के जहाज “विश्व आशा” पर बतौर सेकंड इंजिनियर कार्यरत था | उसके जन्म की खबर मुझे तार द्वारा जहाज पर ही मिली थी | उसके स्वागत का किस्सा तो मुझे जयपुर आने के बाद पता चला था |


खासकर हमारी बड़ी बेटी पूजा बहुत ज्यादा खुश थी | नोनू के रूप में, घर में उसके साथ खेलने को अब एक नया हमउम्र सदस्य आ गया था | होने को घर में सदस्य तो बहुत सारे थे और पूजा की जरूरत से ज्यादा ही देखभाल करते थे | सभी लोग उसके आगे पीछे घूमते थे और उसकी हर फरमाइश कहने के साथ ही पूरी होती थी | लेकिन उसके साथ खेलने के लिहाज से उम्र में सभी बहुत बड़े थे | पूजा उसके साथ दोस्ती करने और खेलने को ज्यादा ही उत्सुक नज़र आ रही थी | घर के सभी सदस्य दोनों बच्चों पर पूरी निगरानी रख रहे थे |


पूजा को खाने पीने में मिठाइयाँ या चोकलेट पसंद नहीं थे | उसकी पसंदीदा चीज बीकानेरी भुजिया और किशमिश होती थी | मंजू उसको कटोरी में थोड़ी सी भुजिया डालकर दे देती थी और वो पूरे घर में घूम घूम कर चम्मच से धीरे धीरे खाती रहती थी | पूजा बहुत शांत, सफाई पसंद, दयालु और देखभाल करने वाली लड़की थी | नोनू उसको देखते ही अच्छी लगी थी |


दिवाली का समय था | घर में त्यौहार का माहौल था | सभी अपने अपने तरीके से दिवाली की तैयारी में व्यस्त थे | सबकी निगाह से बचकर, इस बीच दोनों बच्चों को, एक दूसरे के साथ कुछ समय मिल गया | अचानक मंजू ने नोनू के रोने की आवाज़ सुनी | आवाज़ भी थोड़ी टूटी टूटी सी और रुक रुक कर आ रही थी | मंजू दौड़कर ड्राइंग रूम में आयी | दोनों बच्चे वहीँ खेल रहे थे | नोनू को देखने पर पता चला, उसका मुंह बीकानेरी भुजिया से भरा हुआ था | इसीलिये, ना वो ठीक से सांस ले पा रही थी, और ना ही रो पा रही थी |


तुरंत ही मंजू ने सबसे पहले नोनू के मुंह में ऊँगली डालकर सारी बीकानेरी भुजिया बाहर निकाली और उसके बाद उसका मुंह पानी से साफ़ किया | फिर थोडा सा पानी और उसके बाद दूध पिलाया | जब नोनू की हालत नियंत्रण में आ गई और स्थिति सामान्य हो गई, तब मंजू ने पूजा से पूछा,

क्या नोनू को भुजिया तुमने खिलाई ?

पूजा बोली, हाँ मम्मी

मंजू बोली, और तुमने ऐसा क्यो किया ?

पूजा बोली, नोनू अभी अभी बाहर से आयी है, भूखी है | इसीलिये मैंने उसको भुजिया खिला दी |

पूजा ने इस निराले अंदाज़ में अपनी छोटी बहन नोनू का घर में स्वागत किया |

स्वागत बेटी जन्म घर खुशियॉं दिवाली

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