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सपनों का अस्पताल
सपनों का अस्पताल
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© Archana Chaturvedi

Drama Others

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“मीना  तुम्हें कल रात अपनी छोटी मालकिन यानी भाभी के साथ अस्पताल में रुकना है “ जैसे ही सुबह काम पर आई बड़ी मालकिन ने आदेश दिया | मीना ने हां में गर्दन हिलाई और काम में लग गई वैसे भी हां के अलावा कोई चारा भी कहाँ था वो नौकरी करती है यहाँ पर अस्पताल का नाम सुनते ही मीना अन्दर तक कांप गयी थी उसका दिमाग सुन्न पड़ने लगा जल्दी जल्दी काम ख़त्म करके घर भागी | वहां भी काम नहीं हो रहा था, वो जाकर बिस्तर पर लेट गयी घबराहट के मारे उसे पसीने आ रहे थे वो अतीत में विचरने लगी .......

उसकी माँ की हालत दिन ब दिन बिगड़ रही थी सबने कहा अस्पताल में भर्ती करा दो उसका भाई और मामा शहर के अस्पताल लेकर आये जैसे ही गेट से अन्दर घुसे हर ओर भीड़ ही भीड़ मानो मेला लगा हो, अस्पताल के पार्क में बैंच पर बरामदे में हर तरफ मरीज और उनके घर वाले ही दिख रहे थे और उनका साथ कुत्ते और मक्खियाँ दे रहे थे हर तरफ गंदगी और बदबू छि : ये होता है अस्पताल | बड़ी मिन्नतों और भागदौड़ के बाद उसकी माँ को भर्ती किया गया | माँ को महिला वार्ड में रहना था सो उसको रुकने की इजाजत मिली | जिस वार्ड में माँ को रखा उसमें एक एक बिस्तर पर दो दो मरीज लेटे थे, हर तरफ गंदगी और बदबू थी | माँ को भर्ती तो कर लिया गया पर इलाज शुरू नहीं हो रहा था | उसने नर्स से पूछा “मेरी माँ का इलाज कब शुरू होगा ? तो नर्स ऐसे बोली मानो उसने नर्स को छेड़  दिया हो “ डाक्टर राउंड पर आयेंगे तभी होगा आराम से बाहर बैंच पर बैठ जा” पर डाक्टर कब आयेंगे ? दूसरा प्रश्न पूछते ही नर्स और किलस कर बोली ‘जब उनकी मर्जी होगी आयेगे तुमसे क्या ?’ बेचारी अपना सा मुहं लेकर बैठ गयी थी, माँ बुखार से तप रही थी | बराबर वाले बिस्तर के मरीज की तीमारदार बोली “बेटी क्या करें बैसे तो डाक्टर के चक्कर का समय सुबह शाम दोनों वक्त है पर ज्यादातर वो एक ही समय आते हैं अब सरकारी लोग हैं कौन सवाल करे ? देखो शायद आज जल्दी आ जाएँ”

जैसे तैसे डाक्टर साहब आये और माँ का इलाज शुरू हुआ पर हर चीज का ख्याल उसे ही रखना था, यदि ग्लूकोज की बोतल खाली हो जाए तो नर्स को बुलाने भी भागना पड़ता | बड़ी मिन्नतों से नर्स आती मानो अहसान कर रही हो |

पानी की नलें सूखा घोषित कर रही थी, बाथरूम बाढ़ प्रदेश राज्य बन चुके थे | मरीज और उनके रिश्तेदार जैसे तैसे नाक पर कपडा लपेट अपना काम कर रहे थे | वह बाहर जाकर पीने के लिए पानी तो ले आई पर बाथरूम में जाना किसी नर्क को पार करने से कम नहीं था | मरीज को बाहर का खाना नहीं दे सकते थे पर जो खाना वहां से मिला उसे देखकर उसे उलटी हो गयी बदबूदार पतली दाल, जली हुई रोटी और दूध तो मानो खड़िया घोला पानी था | सवाल कौन करता ? सब गरीब ही तो थे और गरीब को जो मिले चुपचाप ग्रहण करना चाहिए यही तो सीखा है अपनी गरीबी से |

रात को जैसे तैसे वार्ड के बाहर बेंच पर लेटने की जगह मिली, उसी बरामदे में सब तीमारदार जहाँ जगह मिली सो रहे थे | मीना भी सो गयी | अचानक नींद में किसी के हाथ उसे अपने बदन पर महसूस हुए उसने चीखने की कोशिश की... लेकिन  आवाज गले में ही घुट गयी थी वह कातर हिरनी की आँखे फाड़े उस शिकारी को देख रही थी  | एक बार्ड बॉय था जो उसके ऊपर झुका था, उसने उसका मुहं कसकर दबा रखा था | मीना ने पूरी ताकत लगाकर उसे जोर से धकेला और पूरी दम से चिल्लाई बचाओ बचाओ.... वो भाग खड़ा हुआ ..... क्या हुआ ? क्या हुआ ? का शोर उभरा ......

किसी ने जोर से झिंझोड़ा तो वह अतीत से बाहर आई क्या हुआ मीना कोई बुरा सपना देखा क्या ? उसके पति ने सवाल किया और एक गिलास पानी पिलाया | पूरा बदन पसीने से तर था | अरे आप कब आये ? आपको खाना देती हूँ वो उठने को हुई | अरे नहीं तुम बैठो पहले बताओ इतनी परेशान क्यों हो ?

अरे कुछ नहीं रहने दीजिये आपको खाकर साहब के साथ जाना भी होगा ना |

अरे नहीं आज साहब घर पर ही हैं | कल छोटी मालकिन को भर्ती करना है न अस्पताल में | कोई आपरेशन है ना, तुझे रुकना है रात को उनके साथ वो एक रौ में बोल रहा था |

मैं नहीं जाउंगी जी आप साहब को बोल दो ना आपकी बात सुन लेंगे... पुराने ड्राइवर हो आप उनके वो मिन्नत करते हुए बोली

‘क्यों भई दो दिन की तो बात है, ठीक है हमारी शादी को ज्यादा दिन नहीं हुए, तुम्हे मेरे बिना नींद नहीं आएगी ....वो शरारत से बोला फिर रुककर...  साहब के बहुत अहसान हैं हम पर ...देख इतना अच्छा घर भी दे रखा है रहने को, वरना  इस शहर में रहने की कितनी दिक्कत है तू नहीं जानती... फुटपाथो पर पड़े रहते हैं ज्यादातर तर हम जैसे गरीब

हां अहसानों का बदला चुकाने के लिए तो हम जैसे गरीब जेल भी चले जाते हैं फिर ये अस्पताल क्या चीज है” मीना बुदबुदाई

“ये क्या बडबडा रही है मीना अस्पताल और जेल की क्या बराबरी है रे” पति का स्वर तेज हो गया  

तुम्हे नहीं पता क्या ? अस्पताल कितनी गन्दी जगह होती है छि: हम नहीं जायेंगे वहां” मीना बोली

अरे गन्दी कहाँ रे , एकदम होटल जैसे होते हैं, चमचम करते अस्पताल |मैंने देखे हैं

आपको नहीं पता जी आप कब गए बताओ ? मैं  रही थी जब मेरी माँ बीमार हुयी थी और उसने पूरी घटना रामसिंह को बता दी और बोलते बोलते रो पड़ी | पता है अगले दिन से किसी नर्स ने मेरी माँ को दवा नहीं दी , मुझे भी सबने दुत्कारना शुरू कर दिया “चिल्लाएगी ना जा चिल्ला ले”  मेरी माँ बिना इलाज के मर गयी ... वो फूट फूट कर रोने लगी..... उसके बाद दो दिन हमें भगाया... पैसे ऐंठे तब जाकर हमें माँ की लाश मिली बहुत गंदे होते हैं अस्पताल सच्ची में” मीना रोते रोते बोली

“अरी पगली वो सरकारी अस्पताल था | जो सरकार ने हम गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए खोले हैं |” मीना को चुप कराते हुए रामसिंह बोला |

“हां सरकार को लगता होगा ना गरीबों को तो गंदगी में रहने की आदत होती है |” वो धीरे से बोली

“ये तो बड़े लोग हैं खूब पैसा है इनके पास ये थोड़े ही जाते हैं वहां ये लोग तो पराइबेट अस्पताल में जाते  | मैं गया था, जब साहब बीमार पड़े थे.. तब और ये लोग तो बिना बीमार हुए भी जाते हैं, वहां कुछ चेकअप कराने | वो अस्पताल तो एकदम अलग होते हैं, इतने साफ़ फर्श कि हम जैसे तो उन पर खाना ही खा लें और एकदम  ठंडे | सुन्दर साफ़ कुर्सियां ..ठंडा पानी पीने को और बाथरूम तो इत्ते साफ़ चमकते हुए कि क्या कहने , नल के नीचे हाथ लगाओ तो पानी चालू और हटाओ तो बंद | हाथ पोंछने की भी जरुरत नहीं, हाथ सुखाने की मशीन लगी होती है | टॉयलेट में फ्लश को भी हाथ नहीं लगाना पड़ता इधर तुम निबट के उठे... उधर फ्लश चालू ...तू डर मत जइयो ...मैं तो डर गया था पहली बार हा हा हा” वो हंसने लगा |

मीना बोली और आगे सुनाओ ना ... अरे पगली कोई परियों की कहानी सुना रहा हूँ क्या, जो आगे सुनाऊ ..

परियों की कहानी ही तो है जी, ऐसा भी अस्पताल होता है कहीं  ? मैं तो कबसे सपना देखती हूँ साफ़ सुथरे अस्पताल का जी |

होता क्यों नहीं तू कल खुद जाकर देख लेना,सपने में नहीं हकीकत में | मालकिन का अलग से कमरा होगा वहां, जैसे यहाँ है टीवी भी लगा होगा, अलग से बाथरूम भी होगा उसमें और वहीँ तेरे सोने की भी जगह होगी | नर्स को बुलाने भी नहीं जाना पड़ेगा वो खुद आती है तू तो सोना चैन से जब जरुरत लगे तो पलंग के पास लगी घंटी बजाओ नर्स हाजिर |

सच्ची बोल रहे हो जी ? मीना बच्ची की तरह खुश होकर बोली

“एकदम सच्ची रे” रामसिंह बोला

“क्या हम लोगों के लिए ऐसे अस्पताल नहीं बन सकते जी ?”मीना ने पूछा

कहाँ रे लाखों की फीस होती है, यहाँ खूब तनख्वाह मिलती है, डाक्टर और नर्सो को, इन अस्पतालों में हर चीज का पैसा लगता है | वो उदास होकर बोला

क्या सरकारी अस्पताल के डाक्टर और नर्स को तनख्वाह नहीं मिलती  ? उस फ्री के अस्पताल में उनको भी फ्री काम करना पड़ता है क्या ? तभी ऐसे डाक्टर और नर्स हैं वहां” मीना चिंतित होते हुए बोली

रामसिंह पर जबाब नहीं था ...किस किस बात का जबाब दे सरकार तनख्वाह नहीं देती या इनको पैसा हजम कर मुफ्तखोरी की आदत है ..या गरीबों को गंदगी और दुत्कार झेलने की आदत है वो चुप है |

और मीना अस्पताल के सपनों में खोई खाना परोस रही है |

#सपनों का अस्पताल

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