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मेरे जीवन के चार पुरुष
मेरे जीवन के चार पुरुष
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© Pratibha Shrivastava Ansh

Drama

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मेरे जीवन के चार पुरुष...

पांचवे का इंतजार शेष है...

आज जब प्यार पर लिखने बैठी तो, जन्म से आज तक के इस पड़ाव पर नजर डाली। आज के समय जैसा प्यार तो मेरे जीवन में कभी आया ही नहीं तो क्या लिखूं प्यार के विषय में।

आज तक प्यार के नाम पर कभी धड़कन तेज ना हुई, ना कभी दिल के सितार बजे। वैसे देखने में तो ठीक-ठाक ही हूँ, पर कभी किसी वो उस नजर से देखी ही नहीं तो क्या लिखूं प्यार के बारे में...

चलो कोई बात नहीं, इसके अलावा देखें तो मेरे जीवन मे अब तक चार पुरुष आ चुके हैं, जो मुझे अनकंडीशनल प्यार करते हैं।

मेरा पहला प्यार-

मेरे पापा जिनका हाथ थामे चलना सीखी, जो हर विपरीत स्थिति में मेरा साथ देते, वही थे जो मेरी चुप्पी को पढ़ लेते थे। मेरी खुशी से बढ़कर और कोई खुशी न थी उनकी जिंदगी में, तभी तो आज ना होके भी वो मेरे पास हैं और आज भी जब दोराहे पर खड़ी होती हूँ, वो राह दिखाने आते हैं।आज वेलेंटाइन पर आपको बहुत मिस कर रही हूँ पापा।

"हैप्पी वेलेंटाइन डे पापा।"

मेरे जीवन का दूसरा पुरूष-

मेरा भाई, जिसके साथ-साथ खेलते कब मैं बड़ी हुई पता ही नहीं चला।

उसके साथ खेलना-कूदना, छीनकर खाना, बात-बात पर लड़ना और जब बारी आई मेरी बिदाई की सबसे ज्यादा वही रोया, छुप-छुप कर, बेशक मैंने उसे हर साल रेशम के प्रेम धागों में बांधा पर उसने हमेशा मुझे बन्धन से मुक्त रखा और मेरी हर विपत्ति पर मेरी ढाल बनकर चुपचाप खड़ा रहता। ऐसा है मेरा दूसरा प्रेम, मेरा भाई। "लव यू भाई।"

मेरे जीवन का तीसरा पुरुष-

जिसे मैं जीवन का आधारशिला मानती हूँ, मेरे पति, जो कभी मेरी ढाल नहीं बने, अपितु मुझे ही ऐसा बनाने की तैयारी में लगे कि मैं अपनी सुरक्षा स्वयं करूँ। मुझे कभी दूसरे पर आश्रित ना होना पड़े।

दुनिया क्या सोचेगी इसकी फिक्र ना उन्हें कभी थी ना है।

मेरे कुछ अधूरे सपने, जिसको पूरा करने के लिए उन्होंने हमेशा मेरे पीछे से मेरा साथ दिया, मैं जब-जब बिखरी उन्होंने हर बार मुझे समेटा, मुझे निखारा तो कभी माली बनकर मेरे अतरिक्त टहनियों को काटा, ताकि मेरा उचित विकास हो सके।आज मैं एक सफल लेखिका हूँ तो सिर्फ अपने जीवन के तीसरे पुरूष अपने पति की वजह से।

ईश्वर मेरे प्यार की इन लड़ियों को सदा सलामत रखना।

"लव यू माई मव।"

चौथा पुरुष मेरा बेटा है-

जिसके आगमन से मैं परिपूर्ण हुई। बिल्कुल नया एहसास था, जब यह नन्हा मेहमान मेरे आँचल में आया। जिसे पाने के बाद कुछ और चाहत शेष ना रही।

उसे जब-जब देखती तो मानो लगता, मैं दुनिया की सबसे सौभाग्यशाली स्त्री हूँ। वही है जिसके काँधे पर सवार हो मैं मुक्ति धाम को जाऊँगी।

"लव यू बेटू।"

पांचवा पुरुष मेरा पोता होगा मेरे जीवन का-

जिसके साथ मैं उन सभी पलों को जीयूँगी, जो पल इस आपाधापी के जीवन मे छूट रहा है। उसके साथ एक बार फिर से अपना व अपने बच्चे का बचपन जीना चाहूँगी।

बस इतनी-सी ही है मेरी प्रेम कहानी...

पहला प्यार पुरुष चार प्रेम स्नेह आदर वक्त

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